Bharat Shakti Sangh बूढ़े बाबा नाथ धाम
ऊँचाहार, रायबरेली · उत्तर प्रदेश
बूढ़े बाबा नाथ धाम में रात्रि हवन — कबीर जी महाराज की उपस्थिति में
Bharat Shakti Sangh · ऐहारी, मिर्जापुर, ऊँचाहार, रायबरेली (उ.प्र.)
स्वयंभू शिवलिंग · अज्ञेय गहराई · अपरिमित शक्ति

बूढ़े बाबा नाथ धाम शिवतत्त्व के प्रत्यक्ष स्पंदन का केंद्र — जहाँ शिवलिंग की गहराई 15 फीट की खुदाई के बाद भी नहीं मिली। जहाँ महाकाल ने स्वयं आदेश दिया — "मुझे ऐसे ही रहने दो।"

"मुझे ऐसे ही रहने दो।" — बूढ़े बाबा नाथ का दिव्य आदेश, पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी को
स्वयंभूमानव-निर्मित नहीं
15+ फीटखुदाई, फिर भी आधार नहीं
आज्ञा चक्रशिवलिंग कंपन केंद्र
पुनर्जागरणकबीर जी महाराज के नेतृत्व में
स्वयंभू रहस्य

इड़ा और पिंगला का सर्पिल संगम — शिव और शक्ति का पूर्ण संतुलन

आध्यात्मिक दृष्टि से इस शिवलिंग की ऊर्जा संरचना इड़ा और पिंगला नाड़ियों के समान मानी जाती है — दोनों शक्तियाँ एक-दूसरे में सर्पिल रूप से प्रवाहित होती हुईं। यह शिवलिंग आज्ञा चक्र पर विशेष कंपन उत्पन्न करता है, जिससे साधक के भीतर जीवन ऊर्जा, स्थिरता और चेतना का गहन जागरण होता है।

इतिहास एवं दिव्य कथा

पत्थर नहीं — यह शिव की जीवंत उपस्थिति है

बूढ़े बाबा नाथ धाम केवल एक तीर्थ नहीं — यह उन घटनाओं का साक्षी है जो मनुष्य की सामान्य समझ से परे हैं। यहाँ दो महंतों की तपस्या, एक दिव्य आदेश और महाकुंभ में एक अप्रत्याशित मार्ग-परिवर्तन — ये सब मिलकर एक अखंड कथा बनाते हैं।

ऐहारी ग्राम, ऊँचाहार, रायबरेली — उत्तर प्रदेश के इस शांत ग्रामांचल में एक ऐसा शिवलिंग विराजमान है जिसकी गहराई आज तक कोई नहीं नाप सका। स्वयंभू — अर्थात मानव-निर्मित नहीं, स्वयं प्रकट दिव्य स्वरूप।

पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी, बूढ़े बाबा नाथ के पूर्व महंत, ने एक बार शिवलिंग की वास्तविक गहराई जानने का संकल्प लिया। उन्होंने शिवलिंग के चारों ओर खुदाई करवाई। 15 फीट से अधिक गहराई तक खुदाई के बाद भी कोई आधार नहीं मिला — सिर्फ शिवलिंग ही शिवलिंग।

तब पूज्य रामेश्वरानंद जी नंगे शरीर शिवलिंग से लिपटकर गहन भावावस्था में बैठे रहे — और उन्हें एक आंतरिक संदेश प्राप्त हुआ:

"मुझे ऐसे ही रहने दो।" — बूढ़े बाबा नाथ का दिव्य आदेश

उन्होंने तुरंत खुदाई बंद करवाई और गड्ढे को पुनः भरवा दिया। इस दिव्य अनुभव के बाद उन्होंने अपना सम्पूर्ण यौवन इस धाम की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका एक महान स्वप्न था — महाकाल के ठीक सम्मुख महाकाली मंदिर की स्थापना, जिससे शिव और शक्ति का पूर्ण ऊर्जा मंडल निर्मित हो सके।

कोविड काल ने परिस्थितियाँ बदल दीं। आज लगभग 92 वर्ष की आयु में वे पंचकूला स्थित नागली आश्रम में निवास कर रहे हैं। उनका स्वप्न — महाकाली मंदिर की स्थापना — अभी अधूरा है।

बूढ़े बाबा नाथ धाम का प्रवेश द्वार — ऐहारी, ऊँचाहार, रायबरेली
बूढ़े बाबा नाथ धाम — प्रवेश द्वार, ऐहारी मिर्जापुर, ऊँचाहार, रायबरेली
धाम की कुटिया में माँ काली की प्रतिमा और दोनों महंतों के चित्र
कुटिया — माँ काली का स्वरूप, दोनों महंतों की उपस्थिति
परंपरा एवं उत्तराधिकार

दो महंत — एक अखंड तपस्या-धारा

50 वर्षों की साधना और एक अप्रत्याशित दिव्य मिलन ने इस धाम को एक नई शक्ति दी। जब रामेश्वरानंद जी ने कबीर जी महाराज को देखा — उन्हें तत्काल अनुभूति हुई: "यही वह व्यक्ति हैं।"

परम पूज्यनीय रामेश्वरानंद गिरि जी महाराज — पूर्व महंत बूढ़े नाथ बाबा धाम
पूर्व महंत · संरक्षक · परंपरा-धारक

परम पूज्यनीय रामेश्वरानंद गिरि जी महाराज

परंपरा — श्री अद्वैत स्वरूप हीरापुरी परमज्ञान। पूर्व महंत बूढ़े नाथ बाबा धाम, ऐहारी मिर्जापुर, ऊँचाहार, रायबरेली (उ.प्र.)। लगभग 50 वर्षों तक धाम की सेवा, मंदिर निर्माण, गंगाजल व्यवस्था, गौरीकुंड का पुनरुद्धार और शक्तिपीठ की आधारशिला रखने वाले तपस्वी। आयु लगभग 92 वर्ष। वर्तमान में पंचकूला स्थित नागली आश्रम में ध्यान-साधना में लीन।

परम पूज्यनीय कबीर जी महाराज — नव महंत बूढ़े नाथ बाबा धाम
नव महंत · साधक · पुनर्जागरण-नेतृत्व

परम पूज्यनीय कबीर जी महाराज

आध्यात्मिक गुरु एवं पथप्रदर्शक। महंत बूढ़े नाथ बाबा धाम, ऐहारी मिर्जापुर, ऊँचाहार, रायबरेली (उ.प्र.)। ऊर्जा चिकित्सा विशेषज्ञ, आध्यात्मिक पथप्रदर्शक, प्राचीन भारतीय तंत्र और योग साधना के गहन साधक। भूत शुद्धि, मंत्र चिकित्सा, अग्नि साधना, पंचमहाभूत संतुलन और ध्यान विज्ञान के माध्यम से हज़ारों लोगों को सशक्त किया। महाकुंभ में दिव्य प्रेरणा से धाम से जुड़े।

दिव्य मिलन — चंडीगढ़, पंचकूला

"यही वह व्यक्ति हैं" — और चाबी सौंप दी

यह कोई योजनाबद्ध उत्तराधिकार नहीं था। महाकुंभ में एक अदृश्य खिंचाव ने कबीर जी महाराज का मार्ग बूढ़े बाबा नाथ धाम की ओर मोड़ा। और जब वे पंचकूला पहुँचे पूज्य रामेश्वरानंद जी से मिलने — तो वह क्षण इतिहास बन गया।

कबीर जी महाराज पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी का आशीर्वाद लेते हुए — नागली आश्रम, पंचकूला
"अब आप यहाँ अपने ढंग से रहें।" — पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी, कबीर जी महाराज को धाम की कुटिया की चाबी सौंपते हुए

जैसे ही रामेश्वरानंद जी ने कबीर जी महाराज को देखा, उन्हें तत्काल आंतरिक अनुभूति हुई — "यही वह व्यक्ति हैं।" उन्होंने अपनी कुटिया की चाबी उन्हें सौंप दी, स्थानीय परिस्थितियों से अवगत कराया और कहा — "अब आप यहाँ अपने ढंग से रहें।"

तब से कबीर जी महाराज बूढ़े बाबा नाथ धाम में साधना और सेवा के माध्यम से इस धाम को पुनर्जीवित करने में समर्पित हैं। वे इस स्थान को केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि चेतना, शोध और जागरण का केंद्र बनाना चाहते हैं।

यह मिलन अखबारों में भी छपा — "बूढ़ेनाथ बाबा धाम को मिला नया आध्यात्मिक उत्तराधिकारी।"

दृष्टि — आने वाले वर्षों के लिए

केवल मंदिर नहीं — चेतना का जीवंत केंद्र

कबीर जी महाराज की दृष्टि में यह धाम आने वाले समय में ऐसा स्थान बने जहाँ प्राचीन शिवतत्त्व और आधुनिक ज्ञान एक साथ प्रवाहित हों — जहाँ ध्यान के साथ संवाद हो, साधना के साथ विज्ञान हो, और भक्ति के साथ बौद्धिक जागरण भी हो।

01

महाकाली मंदिर की स्थापना

पूज्य रामेश्वरानंद जी का अधूरा स्वप्न — महाकाल के ठीक सम्मुख महाकाली मंदिर, जिससे शिव-शक्ति का पूर्ण ऊर्जा मंडल निर्मित हो। यही धाम का सबसे पवित्र संकल्प है।

02

भूत शुद्धि केंद्र

पंचतत्व शुद्धि और ऊर्जा-चेतन का केंद्र — जहाँ लोग मानसिक बंधनों, नकारात्मकता और सूक्ष्म अशुद्धियों से मुक्ति पा सकें। धाम में स्वयंभू शिवलिंग की ऊर्जा इसे विशेष रूप से शक्तिशाली बनाती है।

03

गुरुकुल — शिक्षा एवं संस्कार

ग्रामीण बच्चों के लिए संस्कार-आधारित शिक्षा केंद्र — जहाँ अक्षरज्ञान के साथ जीवन-बोध, आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदना और वैज्ञानिक दृष्टि भी मिले।

04

आध्यात्मिक शोध केंद्र

साधक, विद्यार्थी, शोधकर्ता और युवा — सभी एक साथ आकर चेतना के विविध आयामों को समझ सकें। विज्ञान, ध्यान और आत्मानुभूति के बीच संतुलित संवाद।

05

सत्संग एवं संवाद केंद्र

नियमित सत्संग, युवा संवाद, और डिजिटल माध्यमों से साधना-संदेश। kabeerjimaharaj.com के माध्यम से आधुनिक पीढ़ी तक आध्यात्मिकता को सुलभ बनाना।

06

अन्नपूर्णा सेवा

धाम में आने वाले साधकों, यात्रियों और ग्रामीण बच्चों के लिए नियमित भोजन-व्यवस्था। सेवा और साधना — एक साथ, एक स्थान पर।

प्रमाण — समाचार पत्र

ऐतिहासिक उत्तराधिकार — अखबारों में भी दर्ज हुआ

कबीर जी महाराज और पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी — उत्तराधिकार का पवित्र क्षण, पंचकूला
देश दीपक त्रिपाठी · लखनऊ
"बूढ़ेनाथ बाबा धाम को मिला नया आध्यात्मिक उत्तराधिकारी"

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद स्थित प्राचीन बूढ़ेनाथ बाबा धाम, ग्राम ऐहारी (ब्लॉक ऊँचाहार) में आज एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्तराधिकार की घोषणा की गई।

महंत श्री रामेश्वरानंद गिरि जी महाराज, जिन्होंने पिछले पचास वर्षों तक बूढ़ेनाथ बाबा की सेवा, मंदिर निर्माण, प्रबंधन, गंगाजल व्यवस्था, गौरीकुंड का पुनरुद्धार और शक्तिपीठ की आधारशिला रखकर क्षेत्र को एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया — अब ध्यान-साधना में लीन हैं।

कबीर महाराज ने बताया कि ऊर्जा साधना व भारतीय तंत्र परंपरा के नवाचारकर्ता, नव नियुक्त महंत कबीर जी महाराज एक ऊर्जा चिकित्सा विशेषज्ञ, आध्यात्मिक पथप्रदर्शक हैं। "शक्ति के बिना न साधना संभव है, न चिंतन और न ही क्रियान्वयन।"

निर्माण सहयोग — आपकी सहभागिता

धाम पुकार रहा है — आपके सहयोग की प्रतीक्षा में

वर्तमान में धाम के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती आधारभूत संरचना है। कबीर जी महाराज कठिन परिस्थितियों में निरंतर सेवा कर रहे हैं — पर यह धाम अकेले उनका नहीं है, यह पूरे समाज का है।

यह सहयोग केवल ईंट-पत्थर के लिए नहीं — यह आपके परिवार के लिए, आपकी आने वाली पीढ़ी के लिए एक मज़बूत आधार और दिशा देने का पुण्यकार्य है।

आवश्यक निर्माण कार्य

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महाकाली मंदिर निर्माण

पूज्य रामेश्वरानंद जी का अधूरा स्वप्न — महाकाल के सम्मुख महाकाली मंदिर की स्थापना। शिव-शक्ति के पूर्ण ऊर्जा मंडल की पूर्ति।

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महाराज जी हेतु शयन कक्ष

कबीर जी महाराज के लिए रहने योग्य, स्वच्छ और सुरक्षित आवास व्यवस्था — ताकि वे निरंतर धाम में रह सकें।

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साधना एवं सत्संग कक्ष

साधकों के लिए ध्यान, प्राणायाम, सत्संग और आध्यात्मिक शोध हेतु समर्पित कक्ष।

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अन्नपूर्णा — रसोई व भोजन व्यवस्था

धाम में नियमित प्रसाद वितरण, ग्रामीण बच्चों का भोजन, और अतिथि-सेवा हेतु रसोई का निर्माण।

🚿

स्वच्छ शौचालय एवं आवासीय व्यवस्था

साधकों और यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालय, स्नान-गृह और आवास की सुविधा।

आपका सहयोग — आपकी संतानों का आधार

यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं है — यह एक ऐसे केंद्र की स्थापना है जहाँ आपके बच्चों को जीवन की दिशा मिलेगी, आपके परिवार को ऊर्जा-संरक्षण मिलेगा, और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी।

"यह धाम आज उन सभी को आमंत्रित करता है जो सेवा, साधना, सहयोग और समर्पण के माध्यम से इस दिव्य केंद्र को पुनः उसकी पूर्ण ऊर्जा में स्थापित करना चाहते हैं।"
कबीर जी महाराज से संपर्क करें kabeerjimaharaj.com
प्रश्न एवं उत्तर

बूढ़े बाबा नाथ धाम के बारे में प्रश्न

बूढ़े बाबा नाथ धाम कहाँ स्थित है?

बूढ़े बाबा नाथ धाम उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद के ऐहारी (मिर्जापुर), ऊँचाहार क्षेत्र में स्थित है। यह रायबरेली जिले का एक अत्यंत प्राचीन एवं शक्तिशाली शिवधाम है।

स्वयंभू शिवलिंग का क्या अर्थ है और इस धाम की विशेषता क्या है?

स्वयंभू का अर्थ है — स्वयं प्रकट, मानव-निर्मित नहीं। यहाँ का शिवलिंग किसी ने बनाया नहीं है, यह स्वयं प्रकट हुआ है। इसकी विशेषता यह है कि 15 फीट से अधिक गहराई तक खुदाई करने पर भी इसका कोई आधार नहीं मिला। आध्यात्मिक दृष्टि से यह शिवलिंग आज्ञा चक्र पर विशेष कंपन उत्पन्न करता है।

पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी और कबीर जी महाराज का इस धाम से क्या संबंध है?

पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी ने लगभग 50 वर्षों तक इस धाम की सेवा, मंदिर निर्माण और प्रबंधन किया। स्वास्थ्य कारणों से वे अब नागली आश्रम, पंचकूला में हैं। महाकुंभ में दिव्य प्रेरणा से कबीर जी महाराज इस धाम से जुड़े और रामेश्वरानंद जी ने उन्हें धाम का उत्तराधिकारी मानकर कुटिया की चाबी सौंपी।

धाम में निर्माण हेतु सहयोग कैसे दें?

धाम में महाकाली मंदिर, साधना कक्ष, अन्नपूर्णा रसोई, महाराज जी के आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के निर्माण हेतु सहयोग के लिए kabeerjimaharaj.com पर संपर्क करें या सीधे कबीर जी महाराज से जुड़ें।

धाम में भूत शुद्धि केंद्र क्यों स्थापित किया जा रहा है?

बूढ़े बाबा नाथ धाम के स्वयंभू शिवलिंग की ऊर्जा इसे भूत शुद्धि (पंचतत्व शुद्धि) के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली बनाती है। कबीर जी महाराज इस स्थान को एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करना चाहते हैं जहाँ लोग नकारात्मकता, मानसिक बंधनों और ऊर्जा-अवरोधों से मुक्ति पा सकें।

बूढ़े बाबा नाथ धाम — सूर्यास्त में निर्माणाधीन मंदिर
बूढ़े बाबा नाथ धाम पुकार रहा है

यह केवल एक स्थान नहीं — यह शिव की जीवंत उपस्थिति है

पूज्य रामेश्वरानंद गिरि जी की अंतिम इच्छा — महाकाली मंदिर की स्थापना — अभी अधूरी है। इसे पूर्ण करना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि एक दिव्य संकल्प की पूर्ति है। आइए, इस पवित्र यात्रा में सहभागी बनें।